Hindi shayari: एक आंसू

चित्र और शब्द मेरे हैं

बस तेरा एक आंसू काफ़ी था,
मेरी सारी दास्तां डुबोने के लिए।
-रुपाली

kavita_13june17

Advertisements

15 thoughts on “Hindi shayari: एक आंसू

  1. आपने दो लाईन में बहुत कुछ कह डाला,समझने और बिस्तार के लिए अथाह है ये।जितना मुझे लगा लिखने का प्रयास किया ।शायद आपको पसंद आये—–

    चित्र भी मेरे शब्द भी मेरे,
    दिल में गहरे जख्म भी मेरे,
    दर्द जिगर का सुनकर भी,
    तेरी आँसूं क्यों ना निकला,
    जिसकी मरहम तेरी आँसूं,
    दिल कैसा जो ना पिघला।
    किश्ती का ऐ बड़ा मुशाफिर,
    सागर तूने ना जाना,
    आँखों में रहकर भी मेरे,
    दिल को ना तू पहचाना,
    मोम की पुतला जैसी मैं थी,
    फूलों से भी कोमल थी,
    जिस राहों पर कदम तुम्हारे,
    उसी राह की मंजिल थी,
    मंजिल की दहलीज पे आया,
    क्यों तेरा रब ना दिखता,
    जिसकी मरहम तेरी आँसूं,
    दिल कैसा जो ना पिघला।
    दास्तान से जिगर भरा है,
    कण-कण में बस तू ही तू,
    हाथों में तस्वीर तुम्हारी,
    ख़्वाबों में बस तू ही तू,
    रात अँधेरी,दिन उजियारे
    आँख बंद या खुले हमारे,
    रोम-रोम,भगवान् की मूरत,
    में भी प्यारे तू दिखता,
    जिसकी मरहम तेरी आँसूं,
    दिल कैसा जो ना पिघला।
    अगर पिघलता तेरा दिल,
    सब शिकवे मेरे मिट जाते,
    तेरी आँख की एक आँसूं की,
    बूंद से सब कुछ मिट जाते,
    दास्तान बरसों की पर,
    एक बूंद की दरिया काफी थी,
    मोम पिघलने की खातिर,
    एक जलती तिल्ली काफी थी,
    मगर तेरा दिल पत्थर जैसा,
    छूकर मुझको ना पिघला,
    जिसकी मरहम तेरी आँसूं,
    दिल कैसा जो ना पिघला।

    Liked by 2 people

    1. वाह मधुसूदन जी आप तो खरे प्रतिभावान हैं, मैं तो यूं ही दो पंक्तियों की कोशिश में लगी रहती हूँ।
      सदर नमन आप को।

      Liked by 1 person

  2. Kavya Mishra

    हम सात भाई बहन, पर एक गायब है ।

    एक बार जब में ट्रेन में सफ़र कर रही थी तो कुछ बातें मन में आयी, काफी प्यारी यादों को ताजा कर देने वाली बातें । हालांकि मैंने उन बातों को लिखा भी

    https://justympass.wordpress.com/2017/07/22/%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%aa%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%82/

    Liked by 2 people

  3. ​खयालों के समंदर में गोते लगाना

    ढूंढकर फिर यादों की मोती निकालना 

    और उन लम्हों को ज़हन में दोहराना ….
    कभी-कभी अच्छा लगता है ! 

    – अनूप राय

    Like

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s