Hindi shayari: एक आंसू

चित्र और शब्द मेरे हैं

बस तेरा एक आंसू काफ़ी था,
मेरी सारी दास्तां डुबोने के लिए।
-रुपाली

kavita_13june17

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6 Responses to Hindi shayari: एक आंसू

  1. Madhusudan says:

    बहुत खूब—–परंतु क्या वो आंसू दास्ताँ डूबा पायी—?

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  2. Madhusudan says:

    आपने दो लाईन में बहुत कुछ कह डाला,समझने और बिस्तार के लिए अथाह है ये।जितना मुझे लगा लिखने का प्रयास किया ।शायद आपको पसंद आये—–

    चित्र भी मेरे शब्द भी मेरे,
    दिल में गहरे जख्म भी मेरे,
    दर्द जिगर का सुनकर भी,
    तेरी आँसूं क्यों ना निकला,
    जिसकी मरहम तेरी आँसूं,
    दिल कैसा जो ना पिघला।
    किश्ती का ऐ बड़ा मुशाफिर,
    सागर तूने ना जाना,
    आँखों में रहकर भी मेरे,
    दिल को ना तू पहचाना,
    मोम की पुतला जैसी मैं थी,
    फूलों से भी कोमल थी,
    जिस राहों पर कदम तुम्हारे,
    उसी राह की मंजिल थी,
    मंजिल की दहलीज पे आया,
    क्यों तेरा रब ना दिखता,
    जिसकी मरहम तेरी आँसूं,
    दिल कैसा जो ना पिघला।
    दास्तान से जिगर भरा है,
    कण-कण में बस तू ही तू,
    हाथों में तस्वीर तुम्हारी,
    ख़्वाबों में बस तू ही तू,
    रात अँधेरी,दिन उजियारे
    आँख बंद या खुले हमारे,
    रोम-रोम,भगवान् की मूरत,
    में भी प्यारे तू दिखता,
    जिसकी मरहम तेरी आँसूं,
    दिल कैसा जो ना पिघला।
    अगर पिघलता तेरा दिल,
    सब शिकवे मेरे मिट जाते,
    तेरी आँख की एक आँसूं की,
    बूंद से सब कुछ मिट जाते,
    दास्तान बरसों की पर,
    एक बूंद की दरिया काफी थी,
    मोम पिघलने की खातिर,
    एक जलती तिल्ली काफी थी,
    मगर तेरा दिल पत्थर जैसा,
    छूकर मुझको ना पिघला,
    जिसकी मरहम तेरी आँसूं,
    दिल कैसा जो ना पिघला।

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