Category Archives: Hindi

आधुनिकता

कुत्ते की हर जरूरियात याद है उसे, बस माँ-बाप का गठिया दिमाग से उतर जाता है। -रुपाली *** यहाँ “कुत्ता” ये शब्द “मेटाफोर” है “स्टेटस सिंबल ” के लिए। ऐसे काफी लोग हैं जो अपने स्टेटस सिंबल को ज्यादा तवज्जों … Continue reading

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शोर

पास बैठे मैं दिल की कहती रही, अचानक उन्होंने पूछा ये शोर कैसा है। -रुपाली

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इतना बता दे…

बस इतना बता दे, झूट क्या है, तेरी आँखें या तेरी बातें। -रुपाली

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संस्कृति!

हजारों साल पुरानी संस्कृति के बचाव हेतु, हाथों में हमने पत्थर उठा लिए हैं, बस हम न अपने दशरथ के राम हो सके और न अपने राम के लक्ष्मण, ये बात अलग है। -रुपाली Hajaron sal purani sanskriti ke bachav … Continue reading

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ऐसा क्यों होता है…

ऐसा क्यों होता है चार दुकाने घूमने के बाद ख़रीदा अदरक छटाक भर, घर आने पर, उसे धोने पर अहसास ये होता, वो पांचवी दुकान जहाँ हम गए नहीं, वहां का अदरक इससे अच्छा होगा। -रुपाली (यहाँ अदरक मेटाफोर या रूपक है … Continue reading

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खुशमिजाजी!

मेरे द्वारा खींची तस्वीर के लिए कुछ शब्द- काम के तो न हम कल थे, न आज हैं। खुशमिजाजी यूं ही तो बरकरार नहीं रहती। -रुपाली (ये तस्वीर मिनिमल (न्यूनतम – जिसमे आपका विषय कम से कम दिखयी दे )फोटोग्राफी दर्शाने के … Continue reading

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“perfect” क्या है बस एक ख्याल …

माँ ने इक उम्र पति के ऐबों को छुपाते गुज़ार दी, बेटियाँ अपना पति अपने पिता की तरह “perfect” नहीं, इस एहसास-ए-कमतरी में गुज़ार रही हैं। – रुपाली

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नमी (moisture in eyes)

मेरे द्वारा खींची एक और तस्वीर के लिए कुछ शब्द – जिंदगी में खुशियाँ कुछ कम नहीं, पर आँखों की नमी है ज्यादा -रुपाली Fellow bloggers please help me translating it in English.

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“बूँद” (Tiny raindrops)

मेरे द्वारा खींची एक और तस्वीर के लिए कुछ शब्द – “बूँद” उसकी याद में आसमां फट पड़ा पूरी तरह खाली हो गया सारी बातें, सारी कसमें बह गयी बस यादों के कुछ पल शाखों पर और पत्तों पर ठहर … Continue reading

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मंज़िल को पाने का भ्रम

मेरे द्वारा खींची तस्वीर के लिए कुछ शब्द मंज़िल को पाने का भ्रम: मंज़िलों की कहानी भी अजीब है यारों जो पास आने का अहसास हो तो फ़ौरन बदल जाती है -रुपाली

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