Tag Archives: Emotions

Shayari: “कल और आज”

नए घर की देहलीज़ लाँघ रही बहू से सास ने कहा बहू पीहर का सब बाहर ही छोड़ आना भीतर न लाना हमारे घर के अपने रिवाज़, अपने तौर तरीके हैं . झुकी नजरों से सास की एक हलकी सी झलक लेते … Continue reading

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Shayari – चित्र लेखन

मेरे द्वारा खींची तस्वीर के लिए कुछ शब्द…

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Mother’s Day Special: माँ भी इंसान है

“माँ”  पर अनगिनत रचनायें रची गयी हैं।   आमतौर माँ  को देवी कहा जाता है या काफी स्टिरिओटाइप बताया जाता है।  लेकिन,   मेरी सोच कुछ अलग है, मेरे लिए माँ एक इंसान है।  शायद इस प्रयास में पद्य की बजाय गद्य ही … Continue reading

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शहर का हर शख्स जाना पहचाना लगता है।

सुबह की भाग दौड़ है कहीं बसों की दौड़ हैं कहीं गाड़ियाँ रुकीं हैं कहीं हर रस्ता पहचाना लगता है। कहीं उम्मीद तो कहीं उदासी है किसी का पेट भरा हुआ तो कोई खाली है कहीं घाव हरे तो कहीं … Continue reading

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दस्तक़

उनकी आज़माइशों पर उतरना छोड़ दिया मैंने, यू  कहे सुकून से जीना सीख़ लिया मैंने।  मेरे दिल के दरवाज़े अभी भी खुले हैं, बस उनके दरवाज़े पर दस्तक़ देना छोड़ दिया मैंने।  Unki ajmaisho par utarna chhod diya meine, yu kahe … Continue reading

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खातिर

तुम्हारी खातिर और एक बार बिख़रने को तैयार हूँ मैं, पर उसके लिए पहले खुद को समेटना जरूरी है।  Tumhari khatir aur ek baar bikharne ko taiyar hoon mein, par uske liye pahale khud ko sametna jaruri hai.

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दिल

कमबख्त दिल भी अजीब सी चीज है मौसम बदले, पर ये न बदला। दर्द जो कल थे वो आज भी हैं 

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Monday Blues & Monday Monochrome

At times there is nothing to hold on to  😦

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Art in reflection (a series)-5

In reality problems are as dense as a raindrop!

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इंतहा

मोहब्बत पर शायरी कुछ इस तरह पढ़ी, कमबख्त हर किसी की आँखों में अपने लिए बस मोहब्बत ही दिखी। इल्तिजा है बस इतना करम करना, कुछ देर ही सही मेरा ये भरम रखना।। Mohobbat par shayari kuch is tarah padhi, kambakht har kisi … Continue reading

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