Winter – day23

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मौसम का मिजाज़

आवारा सा हुआ करता है ,

पेड़ कभी फूल पत्तों  से,

तो कभी…

जमी हुई बर्फ से जाने जाते हैं।

-रुपाली

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क्या मैं वाक़ई में अलग हूँ?

क्या मैं वाक़ई में अलग हूँ?

क्या मैं वाक़ई में अलग हूँ,

आपसे, या उनसे या फिर उनसे,

तो फिर क्यों उठती है ये दीवार बार बार,

कभी इधर से कभी उधर से।

क्यों नहीं मैं  हटा पाती,

इन उलझनों को,

इस कोहरे को,

जो मेरे और आपके, या फिर मेरे और उनके दरम्यान है।

ऐसा क्या है “जो”

हमारी नजरों पर,

हमारे ख्यालों पर,

और हमारे दिमाग पर बार बार,

हावी रहता है।

चलिए मिल कर सोचते हैं।

– रुपाली

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Winter – day5

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पानी 

पानी वो एहसास  है,

जो मानो कभी

जम जाता है।

और जरा सी

गर्मी से पिघल भी जाता है।

-रुपाली

एहसासों का बहना जीवन की निशानी है

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Make sure your emotions are not frozen.

क्या है मेरा पता…

बरसों बाद आज किसी ने मुझसे मेरा पता पूछा,

एक ज़माने में जो लिफाफों पे हुआ करता था।

ना रहे लिफाफे, न वो लाने वाले,

पता याद रखने का सबब बचा ही नहीं।

-रुपाली

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आपका क्या ख़याल है 2.

क्या आप का दिल साफ़ है…

आजकल अख़बार, टीवी, सोशल मिडिया सब जगह पर हमारे देश में होने वाले हादसों की खबरों को पढ़ कर बेहद तालीफ़ होती है. इंसान और दरिंदों में फ़रक है भी या नहीं  ऐसे सवाल उठते हैं।  हादसे दिल दहला देने वाले हैं।  कोई ऐसा कैसे कर सकता है हम बस यही सोचते रह जाते हैं। सभी गुनाहगारों को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। लेकिन क्या आपने इस बात पर गौर किया है,

इन नीच लोगों की वजह से हमने तमाम अच्छे लोगों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब किसी का पुरुष होना उसे दोषी समझने के लिए काफी होगा। हर अच्छी नज़र में हमें मिलावट दिखाई देगी। कोई सच्चे दिल से मदद करने के लिए आगे बढ़ा तो उस पर शक किया जायेगा।

मुझे लगता है ये बात हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरनाक साबित होगी।  शायद लोगों को हर मोड़ पर अपने साफ़ दिल होने की दलीलें पेश करनी पड़ेगी और हम एक साफ-सुथरे समाज से वंचित हो जायेंगे।

आपका क्या ख़याल है -1

आज से मैं एक स्तंभ/काँलम/पेज शुरू कर रही हूँ “आपका क्या ख़याल है”

रोज़मर्रा की जिंदगी में होने वाले वो वाक़ियात जो एक पल में या तो हमें हँसी दे जाते हैं या कुछ सोचने पर मजबूर कर देते हैं। उन्हीं का लेखाजोखा है ये पेज…  

आप सभी से अनुरोध है आप भी अपने ख़याल/विचार साझा करें। 

 कभी रस्ते पर चलने वाले छोटे भाई-बहन को देखें। वो जब तक होसके हाथ थामे रहते हैं।  किसी कारणवश हाथ छूटे तो झट से फिर पकड़ लेते हैं। ये प्यार और अपनेपन का एहसास तमाम उम्र रहे तो कितना अच्छा हो।

मेरी हर एक पोस्ट को में एक नंबर दूँगी और वह इस पेज पर जोड़ दूँगी। 

दरवाज़ा

काफी अरसे  बाद लिखने की कोशिश…

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बेगानों के दरवाजों तक छोड़ने आते हो,

अरे नादान

अपने दिल का दरवाज़ा तो खोल

थक गए हम लोगों के घरों तक जाते।।

-रुपाली

 

 

तकलीफ़

दुनिया में सबसे ज्यादा तकलीफ़,

माँ-बाप की बेबसी पर होती है।

-रुपाली

Duniya mein sabse jyada taleef,

ma-baap ki bebasi par hoti hai


नामी  शायर की रचना 

 

दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते 

अब कोई शिकवा हम नहीं करते। 

-जौन एलिया