“बूँद” (Tiny raindrops)

मेरे द्वारा खींची एक और तस्वीर के लिए कुछ शब्द –

“बूँद”

उसकी याद में आसमां फट पड़ा
पूरी तरह खाली हो गया

सारी बातें, सारी कसमें बह गयी
बस यादों के कुछ पल शाखों पर और पत्तों पर ठहर गए

लेकिन कब तक…
-रुपाली

kavita_11july17

Free translation:

The rain poured heavily

to wash every sign of our togetherness.

A few moments are still hanging on leaves and branches

But until when…

Rupali

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Mother’s Day Special: माँ भी इंसान है


“माँ”  पर अनगिनत रचनायें रची गयी हैं।  

आमतौर माँ  को देवी कहा जाता है या काफी स्टिरिओटाइप बताया जाता है। 

लेकिन,  

aai_baal
Mother and child

मेरी सोच कुछ अलग है,
मेरे लिए माँ एक इंसान है। 

शायद इस प्रयास में पद्य की बजाय गद्य ही दिखे

पर मैं अपनी बात कहना चाहती हूँ।

माँ भी इंसान है

उस में अच्छाई है

तो बुराई भी है।

उसकी अपनी सीमाएं भी हैं

वो सही बात करती है

तो कभी गलत भी होती है।

जहाँ वो पूर्ण है

वहीं वो अपूर्ण भी है।

वो बहुत कुछ सहती है

पर उसकी सहनशीलता की भी सीमा है।

वो बहुत कुछ देती है

पर उसकी अपनी छोटी छोटी ख्वाईशें भी होती हैं।

वो चाहती है सब ठीक हो

पर कभी कभार सब ठीक नहीं होता

संभालना चाहती है पर संभाल नहीं पाती है।

उसकी अपनी मजबूरियाँ होती हैं।

एक अदद निजी जिंदगी भी होती है।

जहाँ चाहतें और रुसवाइयाँ भी होती हैं।

उसकी खुद की कई समस्याएँ होती हैं।

कभी ये शारीरिक तो कभी मानसिक होती हैं

कई बार तो ये सांस्कृतिक भी होती हैं ।

बच्चों को पालते हुए वो भी काफी कुछ संभालती है

कभी अपना वजूद तलाश करती है तो कभी खुद कुछ नया सीखती है

गिरती है, संभलती है, औरों को लिए आगे बढ़ती है।

असली माँ “देवी ” या “स्टिरिओटाइप ” वाली माँ से अलग होती है

ये आपकी और मेरी तरह इंसान होती है।

Nostalgia: आठवणीतील सावंतवाडी!

दुःख ना आनंदही अन्‌ अंत ना आरंभही
नाव आहे चाललेली कालही अन्‌ आजही

Nostalgia
Nostalgia

मी तसा प्रत्यक्ष नाही, ना विदेशी मी जसा
मी नव्हे की बिंब माझे ! मी न माझा आरसा

याद नाही, साद नाही, ना सखी वा सोबती
नाद आहे या घड्याला अन्‌ घड्याच्या भोवती

सांध्यछाया आणि काया जोडुनी यांचा दुवा
नाव आहे चाललेली, दूरची हाले हवा

एकला मी नाही जैसा, नाहि नाहि मी दुणा
जीवनाला ऐल नाही, पैल तैसा, मध्य ना

आरती प्रभू