Winter – day4

feb19_4

Listen to nature.

It suppresses,

the outrage.

-Rupali

 

एहसास

घास पर पत्ते कुछ यूं गिरे,

मानो सहलाने उतरे हों।

अपना वज़न अपनी अना,

ऊपर शाख़ पर ही छोड़ आये।

-रुपाली

sher_04dec18

क्या है मेरा पता…

बरसों बाद आज किसी ने मुझसे मेरा पता पूछा,

एक ज़माने में जो लिफाफों पे हुआ करता था।

ना रहे लिफाफे, न वो लाने वाले,

पता याद रखने का सबब बचा ही नहीं।

-रुपाली

sher_29nov18

 

काश

मेरे द्वारा खींची तस्वीर के लिए कुछ शब्द…

यूं तारों पे न बसर होता,

काश उसकी गली में अपना मकां होता।

बहुत कुछ लुटा देते उस पर,

गर थोड़ी सी जमीं, थोड़ा सा आसमां  होता।

-रुपाली

dp_06nov17

संस्कृति!

हजारों साल पुरानी संस्कृति के बचाव हेतु,
हाथों में हमने पत्थर उठा लिए हैं,
बस हम न अपने दशरथ के राम हो सके
और न अपने राम के लक्ष्मण,
ये बात अलग है।
-रुपाली

Hajaron sal purani sanskriti ke bachav hetu,

hatho mei hamne patthar utha liye hain,

bas ham na apne dashrath ke ram ho sake,

aur na apne ram ke lakshman,

ye baat alag hai.

-Rupali