Tag Archives: Poetry

संस्कृति!

हजारों साल पुरानी संस्कृति के बचाव हेतु, हाथों में हमने पत्थर उठा लिए हैं, बस हम न अपने दशरथ के राम हो सके और न अपने राम के लक्ष्मण, ये बात अलग है। -रुपाली Hajaron sal purani sanskriti ke bachav … Continue reading

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ऐसा क्यों होता है…

ऐसा क्यों होता है चार दुकाने घूमने के बाद ख़रीदा अदरक छटाक भर, घर आने पर, उसे धोने पर अहसास ये होता, वो पांचवी दुकान जहाँ हम गए नहीं, वहां का अदरक इससे अच्छा होगा। -रुपाली (यहाँ अदरक मेटाफोर या रूपक है … Continue reading

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खुशमिजाजी!

मेरे द्वारा खींची तस्वीर के लिए कुछ शब्द- काम के तो न हम कल थे, न आज हैं। खुशमिजाजी यूं ही तो बरकरार नहीं रहती। -रुपाली (ये तस्वीर मिनिमल (न्यूनतम – जिसमे आपका विषय कम से कम दिखयी दे )फोटोग्राफी दर्शाने के … Continue reading

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Speak up

He-She were always together, in all seasons, in all ups and downs. One day doctor whispered, knowingly or unknowingly, he lurched in the dark why? she is forever thinking. Not all stories have happy ending. Daily prompt – Lurch

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नमी (moisture in eyes)

मेरे द्वारा खींची एक और तस्वीर के लिए कुछ शब्द – जिंदगी में खुशियाँ कुछ कम नहीं, पर आँखों की नमी है ज्यादा -रुपाली Fellow bloggers please help me translating it in English.

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Apple blossoms

An apple tree stands alone for years. Produces blossoms and apples. No one cares but birds and bees.

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“बूँद” (Tiny raindrops)

मेरे द्वारा खींची एक और तस्वीर के लिए कुछ शब्द – “बूँद” उसकी याद में आसमां फट पड़ा पूरी तरह खाली हो गया सारी बातें, सारी कसमें बह गयी बस यादों के कुछ पल शाखों पर और पत्तों पर ठहर … Continue reading

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Hindi poetry: सकारात्मक रहें

रविवार के लिए विचार … (शब्द और चित्र मेरे हैं ) जिंदगी के काफ़ी सारे बोझ ज़रा सी देर के लिए होते हैं हमारे विचारों की गर्मी और सही कोशिश इन्हे पिघला देती है। पर न जाने क्यों हम इनकी … Continue reading

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मैं, रसोई की खिड़की और चाँद

मेरे द्वारा खींची तस्वीर के लिए कुछ शब्द – मैं, रसोई की खिड़की और चाँद बड़े रौब से कहे कि तनहा है वो रसोई की खिड़की से झाँक कर चाँद चुगली कर गया। -रुपाली

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शौक फरमाइए

लिखने की तमन्ना में सब इंतजामात किये फिर कभी यहाँ तो कभी वहाँ बैठे, ख़यालों के समंदर में रवानी थी काफी लफ्ज़ों की कश्ती भी चलती रही बाकी, लहरों की तरह ख़्याल टकराये पर कसम ले लो, हम एक लफ्ज़ भी न … Continue reading

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