Tag Archives: Shayari

Shayari – चित्र लेखन

मेरे द्वारा खींची तस्वीर के लिए कुछ शब्द…

Posted in Hindi, Uncategorized | Tagged , , , , , , , | 3 Comments

शहर का हर शख्स जाना पहचाना लगता है।

सुबह की भाग दौड़ है कहीं बसों की दौड़ हैं कहीं गाड़ियाँ रुकीं हैं कहीं हर रस्ता पहचाना लगता है। कहीं उम्मीद तो कहीं उदासी है किसी का पेट भरा हुआ तो कोई खाली है कहीं घाव हरे तो कहीं … Continue reading

Posted in Hindi, Uncategorized | Tagged , , , , , , | 4 Comments

दस्तक़

उनकी आज़माइशों पर उतरना छोड़ दिया मैंने, यू  कहे सुकून से जीना सीख़ लिया मैंने।  मेरे दिल के दरवाज़े अभी भी खुले हैं, बस उनके दरवाज़े पर दस्तक़ देना छोड़ दिया मैंने।  Unki ajmaisho par utarna chhod diya meine, yu kahe … Continue reading

Posted in Hindi, Uncategorized | Tagged , , , , , , | 4 Comments

खातिर

तुम्हारी खातिर और एक बार बिख़रने को तैयार हूँ मैं, पर उसके लिए पहले खुद को समेटना जरूरी है।  Tumhari khatir aur ek baar bikharne ko taiyar hoon mein, par uske liye pahale khud ko sametna jaruri hai.

Posted in Hindi, Uncategorized | Tagged , , , , , , | 2 Comments

दिल

कमबख्त दिल भी अजीब सी चीज है मौसम बदले, पर ये न बदला। दर्द जो कल थे वो आज भी हैं 

Posted in Hindi, Uncategorized | Tagged , , , , , , | 5 Comments

इंतहा

मोहब्बत पर शायरी कुछ इस तरह पढ़ी, कमबख्त हर किसी की आँखों में अपने लिए बस मोहब्बत ही दिखी। इल्तिजा है बस इतना करम करना, कुछ देर ही सही मेरा ये भरम रखना।। Mohobbat par shayari kuch is tarah padhi, kambakht har kisi … Continue reading

Posted in Hindi, Uncategorized | Tagged , , , , , , , | 6 Comments

आजकल

चहल पहल काफ़ी है पर इन्सान दिखाई नहीं देता. शोरगुल बहुत है पर कुछ सुनाई नहीं देता. सोचती हूँ, इक ऐनक इक आला खरीद लाऊँ, शायद किसी के भितर छुपा इन्सान देख पाऊँ या कुछ अनकही सी बातें सुन पाऊ. -रुपाली

Posted in Hindi, Uncategorized | Tagged , , | 2 Comments

आओ कुछ बडा सोचें!

तुमसे पहले, मुझसे पहले! था ये जहान! मेरे बाद, तुम्हारे बाद! होगा ये जहान! खुशियां, ख्वाब, गम! सब थे, सब होंगे! फिर क्यों ना हम कुछ बडा सोचें! मेरे और तुम्हारे परे सोचें!

Posted in Hindi, Uncategorized | Tagged , , | Leave a comment

सोचना जरूरी है!

सरहदों पर बहुत तनाव है क्या कुछ पता तो करो चुनाव है क्या खौफ़ बिखरा है दोनों सम्तों में तीसरी सम्त का दबाव है क्या — राहत इंदौरी

Posted in Hindi, Uncategorized | Tagged , , | 7 Comments

दिल से

यूं तो मैं एक आम सी शक्सीयत हूँ, बस जमाना अलग नजरिया रखता है!

Posted in Hindi, Uncategorized | Tagged , , | Leave a comment